कानपुर। बिठूर में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक एयरफोर्स कर्मी को केवल एक बुरा सपना देखने की वजह से 7 साल तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। वायुसेना में तैनात अनुराग शुक्ला पर उनकी ही साली ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया था, जिसके बाद उन्हें जेल भी जाना पड़ा। अब अदालत ने पाया है कि जिस घटना को आधार बनाकर केस दर्ज किया गया था, वह वास्तव में कुछ और नहीं बल्कि पीड़िता द्वारा नींद में देखा गया एक बुरा सपना ही था।
हैरान करने वाला फैसला: दवा के नशे में देखा गया ‘बुरा सपना’ और कोर्ट में गवाही
अदालत की कार्यवाही के दौरान सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब पीड़िता ने स्वयं जज के सामने स्वीकार किया कि उस रात उसने एंटीबायोटिक दवाएं ली थीं। पीड़िता ने स्पष्ट किया कि दवाओं के असर के कारण वह गहरी नींद में थी और उसने एक बुरा सपना देखा, जिसमें उसे महसूस हुआ कि उसके जीजा ने उसे पकड़ लिया है। इसी बुरा सपना के भ्रम में उसने चिल्लाना शुरू कर दिया था। अदालत ने पीड़िता के इस बयान को मुख्य आधार माना कि असल में कोई छेड़छाड़ हुई ही नहीं थी।
साजिश या ‘बुरा सपना’: संपत्ति विवाद में निर्दोष को फंसाने का खेल
अनुराग शुक्ला ने अदालत में दलील दी कि यह मामला केवल एक बुरा सपना तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे संपत्ति हड़पने की एक सोची-समझी साजिश थी। उन्होंने बताया कि ससुराल पक्ष उन पर अपनी संपत्ति पत्नी और साली के नाम करने का दबाव बना रहा था और इनकार करने पर इस बुरा सपना वाली कहानी को ढाल बनाकर उन्हें झूठे केस में फंसा दिया गया। इस एक बुरा सपना ने अनुराग के करियर, प्रमोशन और सामाजिक सम्मान को गहरी चोट पहुँचाई।
7 साल की प्रताड़ना का अंत: ‘बुरा सपना’ साबित होने पर ससम्मान बरी
पॉक्सो कोर्ट ने सभी गवाहों और बयानों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद माना कि यह पूरा केस केवल एक बुरा सपना और गलतफहमी पर आधारित था। सात साल के लंबे इंतजार और भारी मानसिक तनाव के बाद, अदालत ने अनुराग शुक्ला को सभी आरोपों से ससम्मान बरी कर दिया है। यह फैसला समाज को आईना दिखाता है कि कैसे एक बुरा सपना या व्यक्तिगत रंजिश किसी बेगुनाह की जिंदगी के सात कीमती साल छीन सकती है।





