कानपुर में सामने आए करोड़ों के साइबर फ्रॉड केस में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। 57 लाख रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी के मामले में एक CISF सिपाही की गिरफ्तारी ने इस पूरे गिरोह के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन उजागर कर दिए हैं।
अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्क का खुलासा
क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह भारत से बाहर बैठकर ऑपरेट किया जा रहा था। कंबोडिया में बैठे साइबर अपराधी बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम को कंट्रोल करते थे और उसे अलग-अलग चैनलों से ट्रांसफर किया जाता था।
CISF सिपाही की भूमिका
गिरफ्तार सिपाही इस नेटवर्क में अहम कड़ी के रूप में काम कर रहा था। वह मामूली रकम के लालच में बैंक खाते उपलब्ध कराता था, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगों द्वारा पैसों के लेन-देन में किया जाता था।
कोलकाता कनेक्शन भी सामने आया
पूछताछ के दौरान यह जानकारी मिली है कि आरोपी सिपाही कोलकाता के कुछ बिचौलियों के संपर्क में था। ये लोग गिरोह के लिए नए खाते जुटाने और नेटवर्क को विस्तार देने का काम करते थे।
रिटायर्ड अधिकारी को ऐसे बनाया शिकार
रामबाग निवासी रिटायर्ड असिस्टेंट कमिश्नर को इस गिरोह ने बेहद सुनियोजित तरीके से फंसाया। ठगों ने उन्हें झूठे आरोपों और गिरफ्तारी के डर से मानसिक दबाव में लिया और वीडियो कॉल के जरिए नकली जांच का माहौल बनाकर 57 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
डीसीपी क्राइम ब्रांच के अनुसार, आरोपी को राउरकेला से गिरफ्तार कर कानपुर लाया जा रहा है। पूछताछ में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां
इस मामले में पुलिस पहले ही कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें झारखंड का मास्टरमाइंड और स्थानीय युवक शामिल हैं। इन्हीं से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस CISF सिपाही तक पहुंची।
निष्कर्ष
यह मामला साफ करता है कि साइबर ठगी अब अंतरराष्ट्रीय गिरोहों के जरिए संचालित हो रही है। पुलिस अब इस नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने की दिशा में तेजी से कार्रवाई कर रही है।
