कानपुर में डिजिटल अरेस्ट गैंग का खुलासा: 57 लाख की ठगी, CISF जवान की संलिप्तता सामने

डर, धोखा और डिजिटल जाल—कानपुर में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का बड़ा खुलासा

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पुलवामा हमले का डर दिखाकर बुजुर्ग दंपत्ति को 12 दिन तक बनाया बंधक, नकली पुलिस सेटअप से रची गई साजिश

कानपुर में साइबर क्राइम पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट ठगी के एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गैंग ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग दंपत्ति को 12 दिनों तक मानसिक रूप से बंधक बनाए रखा और उनसे 57 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के पांच आरोपियों—जय प्रकाश, सुभांकर सिंह, विक्रम सिंह, विनय प्रताप सिंह और राजू ठाकुर—को गिरफ्तार किया है। इनके पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक दस्तावेज, फर्जी कागजात और एक कार समेत कई डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं।

पुलवामा हमले के नाम पर डराकर ठगी

पीड़ित परिवार को व्हाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क किया गया, जहां ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़ित की पत्नी के आधार कार्ड का इस्तेमाल आतंकी फंडिंग में हुआ है। वीडियो कॉल पर वर्दी और नकली पुलिस स्टेशन दिखाकर दंपत्ति को डराया गया और जेल भेजने की धमकी दी गई।

इस डर के चलते पीड़ित ने अलग-अलग बैंक खातों में RTGS के जरिए कुल 57 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।

12 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’

ठगों ने 9 अप्रैल से 21 अप्रैल तक दंपत्ति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा। उनके मोबाइल में एक ऐप इंस्टॉल कर हर गतिविधि पर नजर रखी गई। यहां तक कि उन्हें किसी से बात करने या घर में किसी को बुलाने तक की अनुमति नहीं थी।

नकली थाना और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन

गिरोह ने एंटी-करप्शन ऑफिस जैसा नकली सेटअप तैयार किया था। जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क कई राज्यों और विदेशों तक फैला है।

CISF जवान की भूमिका

मामले में CISF के एक जवान दाऊद अंसारी का नाम भी सामने आया है, जो राउरकेला में तैनात है। आरोप है कि वह ठगी की रकम में कमीशन लेता था और गिरोह से जुड़ा हुआ था।

पुलिस अब उसके रोल की जांच कर रही है और अन्य बैंक खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई जारी है।

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