कानपुर में एक बेहद भावुक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (ITBP) में तैनात एक जवान अपनी मां का कटा हुआ हाथ डिब्बे में लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गया। जवान ने टाटमिल स्थित कृष्णा हॉस्पिटल के डॉक्टरों और स्टाफ पर गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया है। पीड़ित ने मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अचानक बिगड़ी मां की तबीयत
महाराजपुर क्षेत्र निवासी विकास सिंह ITBP की 32वीं बटालियन में सिपाही के पद पर तैनात हैं। विकास के अनुसार, 13 मई को उनकी मां की तबीयत अचानक खराब हो गई और उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी। प्रारंभिक उपचार के बाद उन्हें बड़े अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी गई।
विकास अपनी मां को एंबुलेंस से लेकर जा रहे थे, लेकिन रास्ते में जाम और हालत बिगड़ने के कारण उन्होंने उन्हें टाटमिल स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया।
ICU में भर्ती के बाद हाथ पड़ गया काला
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में महिला को गंभीर स्थिति बताकर ICU में भर्ती किया गया। अगले दिन जब मरीज को होश आया तो उनका दाहिना हाथ काला पड़ चुका था और उसमें तेज सूजन थी। परिवार का कहना है कि महिला दर्द से कराहती रहीं, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
दूसरे अस्पताल में डॉक्टरों ने बताई गंभीर स्थिति
हालत बिगड़ने पर परिजन महिला को कृष्णा हॉस्पिटल से निकालकर पारस हॉस्पिटल ले गए। वहां जांच के दौरान पता चला कि कलाई के आगे रक्त संचार पूरी तरह रुक चुका था। डॉक्टरों ने हाथ बचाने का प्रयास किया, लेकिन संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ने पर महिला का दाहिना हाथ काटना पड़ा।
न्याय के लिए मां का कटा हाथ लेकर भटका बेटा
अपनी मां की इस स्थिति से आहत विकास सिंह ने अस्पताल की लापरवाही का आरोप लगाते हुए पहले स्थानीय थाने और फिर पुलिस कमिश्नर कार्यालय में शिकायत की। उन्होंने कहा कि कई दिनों से वह मां का कटा हुआ हाथ लेकर न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधिकारियों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को जांच के लिए पत्र भेजा है। स्टाफ अफसर अमरनाथ यादव ने बताया कि तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी.
