लोन दिलाने के बहाने दस्तावेज लेकर बनाई फर्जी फर्म, पुलिस कमिश्नर के आदेश पर चौकी प्रभारी निलंबित
बीमारी और पारिवारिक विवाद के बीच शुरू किया ई-रिक्शा चलाना
पनकी क्षेत्र निवासी अर्चना मिश्रा ने पारिवारिक तनाव और तलाक के बाद अपने दो बच्चों की जिम्मेदारी अकेले संभाली। इसी दौरान कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पता चलने पर आर्थिक संकट और गहरा गया। परिवार और इलाज का खर्च उठाने के लिए उन्होंने ई-रिक्शा चलाना शुरू किया।
लोन दिलाने के नाम पर लिया भरोसा और दस्तावेज
अर्चना के मुताबिक, पैसों की जरूरत के चलते उनकी मुलाकात अजय गुप्ता नामक युवक से हुई। उसने बैंक से लोन दिलाने का भरोसा देकर महिला के जरूरी दस्तावेज अपने पास ले लिए। बाद में उन्हीं कागजातों के आधार पर बैंक खाता खुलवाया गया।
महिला के नाम पर बनाई गई फर्जी फर्म
कुछ महीनों बाद महिला को जीएसटी विभाग और आयकर विभाग से करोड़ों रुपये के लेनदेन से जुड़े नोटिस मिलने लगे। जांच में सामने आया कि उनके नाम से “AM उद्योग” नामक फर्जी फर्म बनाई गई थी। इसी फर्म के जरिए करीब 16 करोड़ रुपये का वित्तीय लेनदेन दिखाया गया।
जीएसटी नोटिस मिलने के बाद खुला पूरा मामला
सूरत में नौकरी के दौरान महिला को पहला नोटिस मिला। शुरुआत में वह कानूनी भाषा और दस्तावेज समझ नहीं पाईं, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि उनके नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल बड़े फर्जीवाड़े में किया गया है।
चौकी में नहीं हुई सुनवाई, कमिश्नर तक पहुंची शिकायत
पीड़िता ने आरोप लगाया कि रतनपुर चौकी में शिकायत के बावजूद पुलिस ने गंभीरता नहीं दिखाई। उल्टा उनसे लिखित में यह तक लिखवा लिया गया कि वह कोई कार्रवाई नहीं चाहतीं। बाद में महिला ने सीधे पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई।
चौकी प्रभारी लाइन हाजिर, मुकदमा दर्ज
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर के आदेश पर चौकी प्रभारी आशुतोष दीक्षित को लाइन हाजिर कर दिया गया। साथ ही पनकी थाने में आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस का बयान
सहायक पुलिस आयुक्त अमरनाथ यादव ने बताया कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
