कानपुर में रामनवमी के पावन अवसर पर रावतपुर स्थित ऐतिहासिक रामलला मंदिर, जिसे स्थानीय लोग “छोटी अयोध्या” के नाम से जानते हैं, वहां से शनिवार शाम भव्य शोभायात्रा निकाली गई। करीब 5 किलोमीटर लंबे मार्ग पर हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा क्षेत्र जय श्री राम के उद्घोष से गूंज उठा।
इस शोभायात्रा में महाराष्ट्र के पुणे से आई कलाकारों की टीम ने विशेष आकर्षण पैदा किया। लगभग 15 विशाल ढोलों की थाप और महिलाओं द्वारा बजाए जा रहे डमरुओं की ध्वनि ने माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। इसके साथ ही 50 शंखों और मंजीरों की सामूहिक ध्वनि से पूरा इलाका गूंज उठा।
ढोल-शंख की धुन पर झूमे श्रद्धालु
शाम करीब 6:30 बजे रामलला मंदिर से यात्रा की शुरुआत हुई। यह शोभायात्रा बर्तन वाली गली, सैयदनगर और पप्पू शाह वाली गली समेत कई प्रमुख रास्तों से होकर गुजरी।
रथों पर भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण की आकर्षक झांकियां सजाई गई थीं। श्रद्धालु भगवा टोपी पहनकर और हाथों में जय श्री राम लिखे ध्वज लेकर यात्रा में शामिल हुए। इस दौरान हजारों लोग भक्ति गीतों और ढोल की थाप पर झूमते नजर आए।
कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधियों के साथ विभिन्न जिलों से आए संतों ने भी भाग लिया।
150 साल पुराना है रामलला मंदिर का इतिहास
आयोजक अवध बिहारी मिश्रा के अनुसार रावतपुर का यह रामलला मंदिर करीब डेढ़ सौ साल पुराना है। बताया जाता है कि इस मंदिर की स्थापना रीवा की महारानी ने करवाई थी।
मंदिर में भगवान राम की लगभग 6 इंच की दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है, जिसमें बाल स्वरूप में भगवान अंगूठा चूसते हुए दिखाई देते हैं।
रामलला मंदिर से शोभायात्रा निकालने की परंपरा वर्ष 1988 में राम जन्मभूमि आंदोलन के समय शुरू हुई थी। तब से यह परंपरा लगातार जारी है और अब यह आयोजन हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक बन चुका है।
सुरक्षा के लिए ड्रोन से निगरानी
शोभायात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। पूरे मार्ग पर भारी पुलिस बल और पीएसी के जवान तैनात किए गए।
संवेदनशील इलाके को ध्यान में रखते हुए ड्रोन कैमरों के जरिए लगातार निगरानी की गयी। अधिकारियों का कहना है कि यात्रा को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए हर जरूरी व्यवस्था की गई थी।





